मान्यता की यात्रा

सम्मान एवं मान्यता

1999 से आज तक — निष्काम शिक्षा-सेवा की तीन पीढ़ियों को राज्य सरकार, प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं से मिली मान्यता। यह सम्मान किसी व्यक्ति का नहीं, उस निःस्वार्थ सेवा-भाव का है जिसने हज़ारों विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ा।

1999 – 2003

भैया जी — भामाशाह सम्मान

भैया जी को एक सम्मान समारोह में सम्मानित करते हुए

राजस्थान सरकार की पंचायती राज एवं प्रारम्भिक शिक्षा विभाग ने लगातार पाँच वर्षों तक — जोधपुर एवं बाड़मेर जिलों के सीमावर्ती विद्यालयों में छात्रवृत्ति एवं फर्नीचर हेतु दिए गए जन-सहयोग के लिए — भैया जी को भामाशाह के रूप में सम्मानित किया।

भैया जी इन सम्मानों को कभी अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानते थे; वे इन्हें उन जरूरतमंद छात्राओं को समर्पित करते थे, जिनके लिए यह सहयोग दिया गया।

उनके नाम से नामित मार्ग

भैया जी के कार्यों को स्थायी सम्मान देते हुए जोधपुर, बालोतरा और जसोल की नगर-प्रशासन इकाइयों ने प्रमुख मार्गों को उनके नाम पर समर्पित किया।

जोधपुर में नन्दकिशोर शारदा मार्ग का शिलापट्ट
जोधपुर नन्दकिशोर शारदा मार्ग 28 अप्रैल 2012

पाँचवीं रोड चौराहे से बारहवीं रोड चौराहे तक

बालोतरा में अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा मार्ग का शिलापट्ट
बालोतरा अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा मार्ग 16 अगस्त 2013

प्रथम रेल्वे क्रॉसिंग से मानसरोवर हॉस्पिटल तक

जसोल में युगप्रवर्तक श्री नन्दकिशोर शारदा मार्ग का शिलापट्ट
जसोल युगप्रवर्तक श्री नन्दकिशोर शारदा मार्ग 8 नवम्बर 2022

जसोल लघु उद्योग मण्डल से तिलवाड़ा सर्कल तक

2006 – 2017

माँ बसन्ती जी — प्रशासनिक एवं सामाजिक सम्मान

माँ बसन्ती जी को एक सम्मान समारोह में प्रशस्ति-पत्र प्रदान करते हुए

भैया जी के महाप्रयाण के पश्चात् साधना और सेवा दोनों का दायित्व सँभालने वाली माँ बसन्ती जी को जिला प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने बार-बार सम्मानित किया।

2006 से 2017 तक मिले ये सम्मान-पत्र निष्काम शिक्षा-सेवा की निरन्तरता की सामाजिक मान्यता हैं।

2023 – 2025

मधु माँ — वर्तमान नेतृत्व की मान्यता

मधु माँ को शिक्षा विभाग, जोधपुर द्वारा जिला स्तरीय भामाशाह सम्मान प्रदान करते हुए, 11 सितम्बर 2023

मधु माँ के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पंचायत समितियों और महिला-सम्मान संस्थाओं ने निरन्तर सेवा-कार्य को सम्मानित किया है — यह सिलसिला आज भी जारी है।

2023 से 2025 के बीच मिले ये सम्मान वर्तमान नेतृत्व में भी उसी निष्काम सेवा-भाव के अटूट रहने का प्रमाण हैं।

सम्मान से बड़ी है सेवा की निरन्तरता

ये प्रमाण-पत्र और मार्ग-नामकरण किसी व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों से अनवरत चल रही निष्काम शिक्षा-सेवा के प्रति समाज और प्रशासन के विश्वास का प्रमाण हैं।