
पाँचवीं रोड चौराहे से बारहवीं रोड चौराहे तक
1999 से आज तक — निष्काम शिक्षा-सेवा की तीन पीढ़ियों को राज्य सरकार, प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं से मिली मान्यता। यह सम्मान किसी व्यक्ति का नहीं, उस निःस्वार्थ सेवा-भाव का है जिसने हज़ारों विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ा।
राजस्थान सरकार की पंचायती राज एवं प्रारम्भिक शिक्षा विभाग ने लगातार पाँच वर्षों तक — जोधपुर एवं बाड़मेर जिलों के सीमावर्ती विद्यालयों में छात्रवृत्ति एवं फर्नीचर हेतु दिए गए जन-सहयोग के लिए — भैया जी को भामाशाह के रूप में सम्मानित किया।
भैया जी इन सम्मानों को कभी अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानते थे; वे इन्हें उन जरूरतमंद छात्राओं को समर्पित करते थे, जिनके लिए यह सहयोग दिया गया।
भैया जी के कार्यों को स्थायी सम्मान देते हुए जोधपुर, बालोतरा और जसोल की नगर-प्रशासन इकाइयों ने प्रमुख मार्गों को उनके नाम पर समर्पित किया।

पाँचवीं रोड चौराहे से बारहवीं रोड चौराहे तक

प्रथम रेल्वे क्रॉसिंग से मानसरोवर हॉस्पिटल तक

जसोल लघु उद्योग मण्डल से तिलवाड़ा सर्कल तक
भैया जी के महाप्रयाण के पश्चात् साधना और सेवा दोनों का दायित्व सँभालने वाली माँ बसन्ती जी को जिला प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने बार-बार सम्मानित किया।
2006 से 2017 तक मिले ये सम्मान-पत्र निष्काम शिक्षा-सेवा की निरन्तरता की सामाजिक मान्यता हैं।
मधु माँ के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पंचायत समितियों और महिला-सम्मान संस्थाओं ने निरन्तर सेवा-कार्य को सम्मानित किया है — यह सिलसिला आज भी जारी है।
2023 से 2025 के बीच मिले ये सम्मान वर्तमान नेतृत्व में भी उसी निष्काम सेवा-भाव के अटूट रहने का प्रमाण हैं।
ये प्रमाण-पत्र और मार्ग-नामकरण किसी व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों से अनवरत चल रही निष्काम शिक्षा-सेवा के प्रति समाज और प्रशासन के विश्वास का प्रमाण हैं।