साप्ताहिक आध्यात्मिक मार्गदर्शन

आध्यात्मिक ज्ञान चर्चाएँ

भौतिक उपलब्धियों के बीच भी जब मन अशांत और आनन्द-रहित लगे, तो यह प्रश्न उठता है — सच्ची और स्थायी शांति कहाँ मिले? इसी जिज्ञासा के उत्तर की दिशा में मणिद्वीप में प्रत्येक रविवार सायंकाल आध्यात्मिक ज्ञान चर्चाएँ आयोजित होती हैं। माँ बसन्ती जी के संरक्षण में आरम्भ हुई यह परम्परा आज मधु माँ के मार्गदर्शन में निरन्तर जारी है।

समयप्रत्येक रविवार
सायं 7:00 से 8:30 बजे
स्थानमणिद्वीप
अध्यात्म परिवार, जोधपुर
माध्यमबुद्धि-विवेक योग
साधना पद्धति
आधार

भैया जी का दिव्य ज्ञान — आज के जीवन के अनुरूप

युगप्रवर्तक भैया श्री नन्दकिशोर जी शारदा ने इस युग में जगत्जननी माँ से जो ज्ञान प्राप्त किया, वह आज के सामाजिक परिवेश, मानव के बौद्धिक विकास और आवश्यकताओं पर आधारित है। यह ज्ञान सत्य, शाश्वत, सरल, सहज, व्यावहारिक, व्यवस्थित, तर्कसंगत, सात्विक, सार्थक और सार्वभौमिक है।

यह स्वानुभूत ज्ञान भौतिक और आध्यात्मिक जीवन को अलग-अलग नहीं, बल्कि समग्रता में देखता है। इसीलिए व्यक्ति भौतिक जीवन में भी आनन्दित रह सकता है और अपने आध्यात्मिक लक्ष्य भी प्राप्त कर सकता है।

स्वरूप

इन चर्चाओं में क्या होता है

मणिद्वीप में रविवारीय आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा — मधु माँ के मार्गदर्शन में सम्मिलित परिवार
प्रत्येक रविवार सायंकाल मणिद्वीप में सम्मिलित होते साधक-परिवार — बच्चे, युवा और वरिष्ठजन एक साथ।

प्रत्येक रविवार सायं 7:00 से 8:30 बजे तक आयोजित इन चर्चाओं में भैया जी के दिव्य ज्ञान को वैज्ञानिक आधार पर व्यवहार में लाना सिखाया जाता है। बुद्धि-विवेक योग साधना पद्धति के माध्यम से मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन दिया जाता है, और दैनिक चुनौतियों, मानसिक तनाव, पारिवारिक संबंधों तथा व्यक्तिगत समस्याओं को समझने एवं उनके संतुलित समाधान की दिशा में विचार-विमर्श किया जाता है।

  • विवेक-बुद्धि के जागरण, सकारात्मक सोच, नैतिकता, आत्मविश्लेषण और आत्मनियंत्रण पर विशेष बल।
  • परिवार में परस्पर सम्मान, प्रेम और संवाद बनाए रखने तथा मतभेदों को समझदारी से सुलझाने की प्रेरणा।
  • तनावपूर्ण परिस्थितियों में संयमित दृष्टिकोण अपनाना।
  • अपने भीतर सद्गुणों का विकास कर मनुष्यत्व से देवत्व की ओर अग्रसर होना।

अंतिम उद्देश्य है — आनन्द, शांति और खुशी से जीते हुए ईश्वर की प्राप्ति का प्रयास कर मानव जीवन के मूल उद्देश्य को पूर्ण करना।

प्रभाव

स्वयं से समाज तक

आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा में प्रार्थना का क्षण — हाथ जोड़े साधक
चर्चा के आरम्भ में सामूहिक प्रार्थना — भीतर की शांति से ही समाज की सेवा का भाव जागता है।

जो साधक इन चर्चाओं को नियमित रूप से चिंतन-मनन कर जीवन में धारण कर रहे हैं, वे न केवल तनावमुक्त होकर अपने जीवन का निर्माण कर रहे हैं, बल्कि परिवार, समाज, देश और विश्व के कल्याण में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

इस प्रकार ये आध्यात्मिक ज्ञान चर्चाएँ बुद्धि-विवेक, आत्मविकास और सेवा को एक साथ जोड़ते हुए विश्व-बन्धुत्व, विश्व-शान्ति और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसे व्यापक मानवीय मूल्यों की दिशा में योगदान का माध्यम बन रही हैं।

सम्मिलित होना चाहते हैं?

ये चर्चाएँ सभी के लिए खुली और पूर्णतः निःशुल्क हैं। किसी भी रविवार सायंकाल मणिद्वीप पधारें।