ज्ञानयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा अध्यात्म केन्द्र
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा से प्रारम्भ होकर खाद्य-सहायता, योग, स्वास्थ्य और महिला आत्मनिर्भरता तक विस्तृत होती निष्काम सेवा-धारा।
हर सेवा, एक वास्तविक आवश्यकता से जन्मी
स्वामी विवेकानन्द स्टूडेन्ट्स वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट एवं माँ शारदामणि ट्रस्ट के माध्यम से प्रत्येक वर्ष सैकड़ों छात्राएँ कक्षा 9वीं से उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई कर अपना भविष्य सँवारने लगीं।
सन् 2003 में भैया श्री नन्दकिशोर जी शारदा के चैतन्यस्वरूप होने के पश्चात् माँ बसन्ती जी ने शिक्षा एवं सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाया। इसी दौरान उन्होंने अनुभव किया कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण केवल बालिकाएँ ही नहीं, बल्कि कमजोर परिवारों के बालक भी उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा से वंचित हो रहे थे।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, जगत्जननी माँ के निर्देशानुसार वर्ष 2010 में ज्ञानयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा अध्यात्म केन्द्र की स्थापना हुई।
केन्द्र का हर सेवा-कार्य किसी पूर्व-योजना से नहीं, बल्कि हमारे अपने विद्यार्थियों और उनके परिवारों — इसी विस्तृत परिवार — की किसी सच्ची आवश्यकता से आरम्भ हुआ। जैसे-जैसे आवश्यकता सामने आती गई, सेवा का स्वरूप भी विस्तृत होता गया।
स्कूली, उच्च और व्यावसायिक शिक्षा में सहयोग
केन्द्र का पहला कार्य वही था जिसकी आवश्यकता सबसे पहले दिखी — जरूरतमंद बालकों को स्कूली, उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग। चयन-दृष्टि और नियम वही रखे गए जिन पर बालिका-ट्रस्ट चलते हैं — सहायता अंकों से नहीं, आर्थिक आवश्यकता से जुड़ी, और जाति, धर्म या सम्प्रदाय का कोई भेद नहीं।
इसके माध्यम से अनेक विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग, चिकित्सा, नर्सिंग, सी.ए., सी.एस., एम.बी.ए., बी.बी.ए. आदि उच्च एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को नई दिशा दी।
इन अवसरों ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और रुचि के अनुरूप क्षेत्र चुनने, व्यावसायिक दक्षता विकसित करने और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिया।
स्थापना से मार्च 2026 तक — ₹57 लाख+ छात्रवृत्ति सहायता, 631 बालक लाभान्वित।
जब अपने ही परिवारों को सहारे की आवश्यकता हुई
कोरोना काल में अनेक ऐसे परिवार अचानक आर्थिक संकट में आ गए जो केन्द्र से जुड़े थे — यानी हमारे अपने विद्यार्थियों के ही घर। पढ़ाई का सहयोग तो चल रहा था, पर घर में भोजन का प्रबन्ध कठिन हो गया था।
अक्टूबर 2020 में लगभग 50 परिवारों के साथ प्रतिमाह राशन-सामग्री वितरण का कार्य आरम्भ हुआ — सबसे पहले इन्हीं विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए।
आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने पर अनेक परिवारों ने स्वयं आग्रह कर यह सहायता छोड़ दी, ताकि वह किसी और अधिक जरूरतमंद परिवार तक पहुँच सके। आज यह सेवा जोधपुर और बालोतरा क्षेत्र के लगभग 300 जरूरतमंद परिवारों तक नियमित रूप से पहुँच रही है।
आरम्भ से अब तक — ₹1.07 करोड़+ की राशन-सामग्री वितरित।
परिवार की बेटियों और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक ज़रूरत
2021 में माँ बसन्ती जी के चैतन्यस्वरूप होने के पश्चात् नेतृत्व सँभालते हुए मधु माँ ने अनुभव किया कि परिवार की बेटियों और महिलाओं में स्वास्थ्य और आत्म-देखभाल के प्रति जागरूकता उतनी ही आवश्यक है जितनी शिक्षा। शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन को उन्होंने सशक्तिकरण का आधार माना।
10 जून 2022 से अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा साधना-स्थली सिद्धपीठ (कबूतरों का चौक) में आमजन के हितार्थ निःशुल्क योग कक्षाओं का शुभारम्भ हुआ, जो निरन्तर संचालित हैं। प्रशिक्षित योगाचार्य के मार्गदर्शन में प्रतिदिन प्रातः 7:15 से 8:15 बजे तक सूक्ष्म व्यायाम, प्राणायाम, आसन और ध्यान का अभ्यास कराया जाता है।
स्वास्थ्य-जागरूकता को महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए विभिन्न विद्यालयों में योग शिविर आयोजित कर बालिकाओं और महिलाओं को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया है।
योग कक्षा सभी के लिए खुली है — प्रतिदिन प्रातः 7:15–8:15, सिद्धपीठ (कबूतरों का चौक)। सम्मिलित होने के लिए संपर्क करें
वात्सल्यमयी माँ बसन्ती जी मनिहार सिलाई केन्द्र
केन्द्र से जुड़े परिवारों की माताओं, बहनों और अन्य जरूरतमंद महिलाओं को एक ऐसी आजीविका की आवश्यकता थी जिसे वे सम्मान के साथ अपने घर से जोड़ सकें।
यह कार्य धीरे-धीरे आरम्भ हुआ — पहले अलग-अलग जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीन और सहयोग देकर। सन् 2025 में यह वात्सल्यमयी माँ बसन्ती जी मनिहार के नाम पर निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में स्थापित हुआ।
निःशुल्क प्रशिक्षण के माध्यम से यह केन्द्र महिलाओं और युवतियों को स्वरोजगार और स्वाभिमान के साथ अर्जित आजीविका की दिशा देता है।
जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और सेवा एक ही करुणा-धारा में मिलते हैं।
एक विद्यार्थी की आवश्यकता से आरम्भ हुई यह सेवा आज शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य और स्वरोजगार — चार धाराओं में बहती है, पर भाव एक ही है: अपने परिवार के प्रति करुणा। हर कार्य के मूल में वही दृष्टि है जो भैया जी और माँ बसन्ती जी ने दी — आत्म-अनुशासन, सकारात्मक दृष्टि और सेवा-भाव को जीवन से जोड़ना।
पंजीकरण एवं पारदर्शिता
यह ट्रस्ट आयकर अधिनियम की धारा 12A एवं 80G के अंतर्गत पंजीकृत है। इसके पंजीकरण दस्तावेज़ और 2019–20 से वर्ष-वार अंकेक्षित वित्तीय प्रतिवेदन पारदर्शिता पृष्ठ पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
दस्तावेज़ देखें