श्री नन्दकिशोर शारदा ज्ञान गंगा मिशन

ज्ञान गंगा की अविरल धारा

सद्साहित्य के माध्यम से शाश्वत ज्ञान का संरक्षण, प्रकाशन एवं प्रसार। सभी पुस्तकें मणिद्वीप में जिज्ञासु पाठकों के लिए निःशुल्क उपलब्ध हैं।

मणिद्वीप का अध्यात्म पुरुष पुस्तक का आवरण 01 मणिद्वीप का अध्यात्म पुरुष
2003 · 2006 · 2011

मणिद्वीप का अध्यात्म पुरुष: श्री नन्दकिशोर शारदा

सम्पादक: प्रो. (डा.) रामप्रसाद दाधीच ‘प्रसाद’ · सह-सम्पादक: सुश्री मधुबाला अडवानी

एक व्यक्ति का परिचय केवल बड़े शब्दों से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन पर छोड़ी गई अमिट छाप से मिलता है। श्री नन्दकिशोर शारदा ऐसे ही युगपुरुष थे।

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उनके प्रेरणादायी विचार, समर्पण, अध्यात्म, सेवा और मानवीय मूल्यों ने अनगिनत लोगों को प्रभावित किया। यह स्मृतिग्रंथ 300 से अधिक व्यक्तियों के संस्मरणों के माध्यम से उनके सान्निध्य में प्राप्त प्रेरणाओं, अनुभवों और जीवन-स्पर्शी प्रसंगों को साझा करता है। प्रत्येक अध्याय यह विश्वास जगाता है कि निष्काम सेवा, अध्यात्म और मानव प्रेम कभी कालातीत नहीं होते।

मृत्यु के बाद का अलौकिक संसार पुस्तक का आवरण 02 मृत्यु के बाद का अलौकिक संसार
2003

मृत्यु के बाद का अलौकिक संसार

लेखक: नन्दकिशोर शारदा

मृत्यु — क्या यह अंत है, या किसी नई यात्रा का प्रारम्भ? यह पुस्तक इस प्राचीन प्रश्न को विज्ञान और आध्यात्मिक अनुभूति के समन्वय से देखती है।

अंग्रेज़ी संस्करण — The Wonderful World After Death (2004), निःशुल्क उपलब्ध।

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वर्षों की कठिन साधना, गहन चिंतन, जगत्जननी माँ प्रदत्त शाश्वत ज्ञान और आत्मानुभूति के आधार पर भैया जी ने विज्ञान के मूल सिद्धान्तों और अध्यात्म का समन्वय करके ब्रह्माण्ड, चैतन्य शक्ति, ईश्वर की सत्ता, दिव्य लोक तथा मृत्यु के पश्चात् की अवस्था जैसे शाश्वत प्रश्नों को सरल और प्रमाणिक ढंग से समझाया है। इस दिव्य पुस्तक के निष्पक्ष पठन-चिंतन से अनेक नास्तिक व्यक्तियों का आध्यात्मिक रूपान्तरण हुआ है।

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चक्रधारी युगप्रवर्तक अध्यात्मयोगी पुस्तक का आवरण 03 चक्रधारी युगप्रवर्तक अध्यात्मयोगी
2015

माँ त्रिपुरसुन्दरी के लाडले चक्रधारी युगप्रवर्तक अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा

सम्पादक: प्रो. (डा.) रामप्रसाद दाधीच ‘प्रसाद’ · सह-सम्पादक: सुश्री बसन्ती मनिहार एवं ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार

एक युगपुरुष का मूल्यांकन केवल उसके जीवन से नहीं, बल्कि उसके द्वारा जगाई गई चेतना से होता है।

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प्रख्यात विद्वान प्रो. डॉ. रामप्रसाद दाधीच द्वारा लिखित यह कालजयी कृति श्री नन्दकिशोर शारदा के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके मौलिक आध्यात्मिक चिंतन का प्रामाणिक एवं व्यापक परिचय कराती है। उनके आध्यात्मिक अनुसंधान तथा विभिन्न लोकहितकारी सत्कर्मों द्वारा समाज के प्रति उनके विराट योगदान का यह एक प्रामाणिक दस्तावेज है।

मणिद्वीप की एक दीपशिखा पुस्तक का आवरण 04 मणिद्वीप की एक दीपशिखा
2016

मणिद्वीप की एक दीपशिखा - जीजी बसन्ती मनिहार

लेखक: प्रो. (डा.) रामप्रसाद दाधीच ‘प्रसाद’

माँ बसन्ती मनिहार का जीवन श्रद्धा, साधना, समर्पण और निष्काम सेवा के दिव्य प्रकाश से परिचित कराता है।

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प्रख्यात साहित्यकार प्रो. डॉ. रामप्रसाद दाधीच द्वारा प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर रचित यह कृति गद्य और पद्य का अद्भुत संगम है। इसका प्रत्येक अध्याय माँ बसन्ती जी के जीवन के एक नए प्रेरणादायी आयाम को उद्घाटित करता है। यह श्रद्धा, साधना और निष्काम सेवा से प्रज्वलित ऐसी निष्कम्प दीपशिखा है, जो आज भी अनगिनत हृदयों की राह प्रकाशित कर रही है।

सिद्धपीठ के ज्योतिपुरुष पुस्तक का आवरण 05 सिद्धपीठ के ज्योतिपुरुष
2020

भौतिकता में आनन्द, शांति, समृद्धि एवं कल्याण के प्रणेता सिद्धपीठ के ज्योतिपुरुष, युगप्रवर्तक, अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा

लेखक: प्रो. (डा.) रामप्रसाद दाधीच ‘प्रसाद’

मुक्त छंद में लिखी गई यह कृति भैया जी के व्यक्तित्व, साधना, चिंतन, कर्मयोग और मानवीय मूल्यों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है।

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जब लेखक को अपने छात्र श्री नन्दकिशोर शारदा के गहन आध्यात्मिक स्तर का ज्ञान हुआ, तब भौतिक स्तर पर गुरु-शिष्य सम्बन्ध का भेद उनके मन से समाप्त हो गया। अपने चार दशकों के आत्मीय सान्निध्य, प्रत्यक्ष अनुभव और गहन अध्ययन के आधार पर उन्होंने 2019 में यह पुस्तक मुक्त छंद में लिखी। यह एक साधक को निकट से देखने, समझने और अनुभव करने का दुर्लभ अवसर है।

भैया जी का जीवन-दर्शन पुस्तक का आवरण 06 भैया जी का जीवन-दर्शन
2022 · 2025

जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी के लाडले युगप्रवर्तक श्री नन्दकिशोर शारदा (भैया)

संकलनकर्ता: ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार

यह प्रेरणादायी कृति उनके दिव्य व्यक्तित्व, ज्ञानयोग, भक्तियोग, निष्काम कर्मयोग और मानव कल्याण के विराट मिशन का सार समेटती है।

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इस पुस्तक को पढ़ते-पढ़ते पाठक केवल भैया जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से परिचित नहीं होता, बल्कि यह अनुभव करने लगता है कि आध्यात्मिकता कोई विचार मात्र नहीं, बल्कि आनन्द, शांति और खुशी से जीने की एक कला है। यह एक संक्षिप्त, प्रामाणिक और प्रेरणादायी मार्गदर्शिका है, जो पाठक को आत्मिक उन्नति और निष्काम सेवा के मार्ग पर चलने का प्रोत्साहन देती है।

2025

जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी की लाडली ‘मणिद्वीप’ की एक दीपशिखा वात्सल्यमयी माँ बसन्ती मनिहार

सम्पादक: प्रो. (डा.) वी. के. भंसाली · सह-सम्पादक: सुश्री मधुबाला अडवानी एवं ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार

यह पुस्तक ज्ञान और कर्म, साधना और सेवा, दर्शन और व्यवहार को माँ बसन्ती जी के जीवन में एक अविभाज्य धारा की तरह प्रस्तुत करती है।

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यह केवल माँ बसन्ती जी के जीवन की घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि जीवंत प्रमाण है कि जब ज्ञान समर्पण से जुड़ता है, तब वह समाज परिवर्तन का आधार बनता है। माँ बसन्ती जी ने अपने गुरु के ज्ञान को आत्मसात कर शिक्षा, संस्कार, निःस्वार्थ सेवा और जनकल्याण के विविध कार्यों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया।

2025

जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी की लाडली वात्सल्यमयी माँ बसन्ती मनिहार - एक समर्पित व्यक्तित्व

संकलनकर्ता: ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार

कुछ पुस्तकें ज्ञान देती हैं, कुछ जीवन जीने की कला सिखाती हैं — यह कृति दोनों का अद्भुत संगम है।

संक्षिप्त परिचय पढ़ें

इस पुस्तक में वात्सल्यमयी माँ बसन्ती जी मनिहार के जीवन, साधना, ज्ञान और मानव कल्याण के कार्यों को समग्रता से प्रस्तुत किया गया है। यह भैया जी के आध्यात्मिक ज्ञान का वर्णन करने के साथ माँ बसन्ती जी द्वारा उस ज्ञान को जीवन में उतारने की व्यावहारिक विधि भी सरल ढंग से समझाती है। ‘गागर में सागर’ के समान यह कृति प्रत्येक आयु वर्ग के लिए उपयोगी है।

मणिद्वीप में निःशुल्क उपलब्ध

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इन ग्रंथों का उद्देश्य केवल पढ़ना नहीं, बल्कि चिंतन, मनन और जीवन में आत्मिक परिवर्तन की प्रेरणा जगाना है।