पहला कदम

साधना कैसे आरम्भ करें

बुद्धि-विवेक योग साधना गृहस्थ जीवन में रहते हुए की जाने वाली सरल साधना है। इसे आरम्भ करने के लिए किसी पूर्व योग्यता, दीक्षा या शुल्क की आवश्यकता नहीं — केवल एक सच्ची जिज्ञासा। नीचे आरम्भ के व्यावहारिक चरण और पहली बार जुड़ने वाले जिज्ञासुओं के सामान्य प्रश्न दिए गए हैं। अध्यात्म और दिव्य ज्ञान से जुड़े गहन प्रश्नों के लिए जिज्ञासा समाधान देखें।

व्यावहारिक चरण

जहाँ से आप हैं, वहीं से

  1. पढ़ें

    भैया जी की कालजयी कृति ‘मृत्यु के बाद का अलौकिक संसार’ से आरम्भ करें। यह ब्रह्माण्ड, चैतन्य शक्ति, ईश्वर की सत्ता और मृत्यु के पश्चात् की अवस्था का विज्ञान-सम्मत, तार्किक विवेचन है। पुस्तक मणिद्वीप में निःशुल्क उपलब्ध है।

  2. चिंतन करें

    पढ़ी हुई बातों को स्वीकार करने से पहले प्रश्न उठाएँ, तर्क की कसौटी पर परखें और हर पहलू पर गम्भीरता से विचार करें। यही ‘ज्ञान → विज्ञान → चिंतन’ का क्रम है, जिससे बुद्धि निर्मल और विवेक जागृत होता है।

  3. मार्गदर्शन लें

    मणिद्वीप या सिद्धपीठ आकर व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करें। यहाँ प्रत्येक साधक की जिज्ञासा, बौद्धिक क्षमता और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुरूप साधना-पद्धति अपनाने का मार्गदर्शन दिया जाता है।

  4. अभ्यास में लाएँ

    ज्ञान से जागृत विवेक को संकल्प, समर्पण और सजग कर्म-साधना के रूप में जीवन में उतारें। यह कोई अनिवार्य सूची नहीं — छः सोपान एक से दूसरे में सहज रूप से प्रवाहित होते हैं। जिसकी जितनी लगन और अभ्यास, उतनी ही सच्ची खुशी और शान्ति।

कहाँ सीखें

साधना-स्थल

मणिद्वीप

ए-183, शास्त्री नगर, जोधपुर, राजस्थान

आस्था, साधना और चैतन्यता से परिपूर्ण साधना-स्थली। शान्तचित्त बैठना ही यहाँ साधना का आरम्भ है।

प्रतिदिन प्रातः 10 से रात्रि 8 बजे तक — सभी का स्वागत है।

आध्यात्मिक ज्ञान चर्चाएँ — प्रत्येक रविवार सायं 7:00 से 8:30 बजे।

अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा साधना-स्थली (सिद्धपीठ)

कबूतरों का चौक, जोधपुर

वह पवित्र स्थल जहाँ शारदा जी ने साधना कर जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी से ज्ञान प्राप्त किया।

निःशुल्क योग, प्राणायाम एवं ध्यान — प्रतिदिन प्रातः 7:15 से 8:15 बजे तक, प्रशिक्षित योगाचार्य के मार्गदर्शन में।

क्या अपेक्षा रखें

कुछ बातें स्पष्ट रूप से

  • कोई शुल्क नहीं — मार्गदर्शन, साधना-स्थल, योग कक्षाएँ और समस्त सद्साहित्य पूर्णतः निःशुल्क। कोई सदस्यता या दीक्षा-शुल्क नहीं।
  • गृहस्थ जीवन चलता रहता है — घर, परिवार या कार्य छोड़ने की आवश्यकता नहीं। भौतिक जीवन का त्याग नहीं, संतुलन और शुद्धि।
  • सबके लिए — जाति, धर्म, सम्प्रदाय, आयु और पृष्ठभूमि की सीमाओं से परे।
  • अपनी गति से — मार्गदर्शन आपकी जिज्ञासा और परिस्थिति के अनुरूप; कोई निश्चित समय-सीमा नहीं।
पहली बार जुड़ने वाले जिज्ञासु अक्सर पूछते हैं

सामान्य प्रश्न

  1. क्या इस मार्ग के लिए हिन्दू होना आवश्यक है?

    नहीं। बुद्धि-विवेक योग साधना और भैया जी का दिव्य ज्ञान जाति, धर्म, सम्प्रदाय, आयु और देश की सीमाओं से परे, प्रत्येक जिज्ञासु के लिए समान रूप से प्रासंगिक हैं। ‘मृत्यु के बाद का अलौकिक संसार’ का विवेचन विज्ञान-सम्मत और सार्वभौमिक है — इसके निष्पक्ष पठन-चिंतन से हर पृष्ठभूमि के अनेक व्यक्तियों, यहाँ तक कि नास्तिकों का भी आध्यात्मिक रूपान्तरण हुआ है। सेवा-कार्यों में भी सहायता का चयन जाति या धर्म के आधार पर नहीं, केवल आवश्यकता के आधार पर होता है।

  2. क्या घर-परिवार, नौकरी या भौतिक जीवन छोड़ना पड़ता है?

    नहीं। यह गृहस्थ जीवन में रहते हुए की जाने वाली साधना है। भैया जी ने भौतिक जीवन के त्याग की नहीं, बल्कि उसके संतुलन और शुद्धि की बात कही। उद्देश्य है — परिवार, कार्य और सामाजिक दायित्वों को निभाते हुए भी भीतर शान्ति, विवेक और आनन्द का अनुभव करना, और मनुष्यत्व से देवत्व की ओर बढ़ना।

  3. क्या कोई शुल्क या सदस्यता है?

    नहीं। साधना का मार्गदर्शन, मणिद्वीप एवं सिद्धपीठ में बैठना, योग कक्षाएँ और मिशन द्वारा प्रकाशित समस्त सद्साहित्य पूर्णतः निःशुल्क हैं। कोई सदस्यता, दीक्षा-शुल्क या अनिवार्य दान नहीं है।

  4. आज मिशन का संचालन कौन करता है?

    भैया जी (2003) और माँ बसन्ती जी मनिहार (2021) के चैतन्यस्वरूप होने के पश्चात्, आज मधु माँ (माँ मधुबाला अडवानी) ‘मणिद्वीप अध्यात्म परिवार’ का नेतृत्व कर रही हैं — दिव्य ज्ञान के प्रचार-प्रसार के साथ शिक्षा, संस्कार, छात्रवृत्ति, सद्साहित्य, योग और मानव सेवा को आगे बढ़ाते हुए। सेवा-कार्य चार पंजीकृत लोक-न्यासों के माध्यम से संचालित होते हैं।

  5. मणिद्वीप कहाँ है और वहाँ कैसे आया जा सकता है?

    मणिद्वीप ए-183, शास्त्री नगर, जोधपुर (राजस्थान) में स्थित है; प्रतिदिन प्रातः 10 से रात्रि 8 बजे तक सभी का स्वागत है। सिद्धपीठ (कबूतरों का चौक) में प्रतिदिन प्रातः 7:15 से 8:15 बजे तक निःशुल्क योग, प्राणायाम एवं ध्यान कक्षाएँ होती हैं। आने की योजना, मार्ग और सम्पर्क-सूत्र के लिए सम्पर्क पृष्ठ देखें।

आरम्भ करने के लिए तैयार हैं?

मणिद्वीप में सम्पर्क करें, या पहले साधना की पूरी पद्धति को समझें।