
महालक्ष्मी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, प्रतापनगर में ‘श्री नन्दकिशोर शारदा स्वागत कक्ष’ और तीन कक्षाओं का निर्माण।
भैया श्री नन्दकिशोर जी शारदा द्वारा प्रदत्त अमूल्य ज्ञान, चिंतन और दस्तावेजों को प्रकाशित कर जन-जन तक पहुँचाने की पावन धारा। यह मिशन ज्ञान के प्रसार के साथ शिक्षा-संस्थानों के विकास में भी सक्रिय सहयोग करता है।
भैया जी के चैतन्यस्वरुप होने के पश्चात् माँ बसन्ती जी एवं मधु माँ द्वारा इस मिशन की स्थापना सद्साहित्य प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण हेतु की गई। इसका मुख्य उद्देश्य भैया प्रदत्त अमूल्य ज्ञान, चिंतन, व्यक्तिगत डायरी जैसे दस्तावेजों और आध्यात्मिक मार्गदर्शन को प्रकाशित कर उसका प्रचार-प्रसार करना ताकि वर्तमान एवं भावी पीढ़ी का उचित मार्गदर्शन हो सके। देश-विदेश में ज्ञान का प्रचार प्रसार कैसे हो, इस पर विचार-विमर्श हो जिससे एक नये युग का सूत्रपात हो सके।
मिशन द्वारा भैया जी के दिव्य ज्ञान, जीवन-वृत्त, हस्तलिखित डायरी, माँ बसन्ती जी के व्यक्तित्व और मणिद्वीप की आध्यात्मिक धारा से जुड़े ग्रंथों का प्रकाशन किया गया है। इन पुस्तकों का उद्देश्य पाठक में श्रद्धा, विवेक, आत्मचिंतन और जीवन की आध्यात्मिक दिशा को जागृत करना है।
मिशन द्वारा प्रकाशित प्रमुख ग्रंथ। सभी पुस्तकें मणिद्वीप में जिज्ञासु पाठकों के लिए निःशुल्क उपलब्ध हैं।
300 से अधिक व्यक्तियों के संस्मरणों से बना स्मृतिग्रंथ। सम्पादक: प्रो. (डा.) रामप्रसाद दाधीच ‘प्रसाद’; सह-सम्पादक: सुश्री मधुबाला अडवानी।
लेखक: श्री नन्दकिशोर शारदा। विज्ञान के मूल सिद्धान्तों और अध्यात्म के समन्वय से ब्रह्माण्ड, चैतन्य शक्ति, दिव्य लोक और मृत्यु के पश्चात् की अवस्था का विवेचन। अंग्रेज़ी अनुवाद The Wonderful World After Death (2004) भी निःशुल्क उपलब्ध है।
सम्पादक: प्रो. (डा.) रामप्रसाद दाधीच ‘प्रसाद’; सह-सम्पादक: सुश्री बसन्ती मनिहार एवं ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार। भैया जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और मौलिक आध्यात्मिक चिंतन का प्रामाणिक एवं व्यापक दस्तावेज।
लेखक: प्रो. (डा.) रामप्रसाद दाधीच ‘प्रसाद’। प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित, गद्य और पद्य का संगम — माँ बसन्ती जी की श्रद्धा, साधना और निष्काम सेवा का परिचय।
लेखक: प्रो. (डा.) रामप्रसाद दाधीच ‘प्रसाद’। चार दशकों के आत्मीय सान्निध्य पर आधारित, मुक्त छंद में रचित (2019) — भैया जी के व्यक्तित्व, साधना, चिंतन और कर्मयोग का चित्रण।
संकलन: ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार। भैया जी के ज्ञानयोग, भक्तियोग, निष्काम कर्मयोग और मानव-कल्याण मिशन का संक्षिप्त, प्रामाणिक परिचय।
सम्पादक: प्रो. (डा.) वी. के. भंसाली; सह-सम्पादक: सुश्री मधुबाला अडवानी एवं ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार। भैया जी के आध्यात्मिक ज्ञान और माँ बसन्ती जी के जीवन को एक अविभाज्य धारा के रूप में प्रस्तुत करती कृति।
संकलन: ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार। ‘गागर में सागर’ के समान — माँ बसन्ती जी द्वारा ज्ञान को जीवन में उतारने की व्यावहारिक विधि, प्रत्येक आयु वर्ग के लिए उपयोगी।
संकलन: ‘मणिद्वीप’ अध्यात्म परिवार। भैया जी द्वारा बारह वर्ष की आयु से — केवल स्वयं के लिए — लिखे गए भाव, प्रश्न, संघर्ष और आध्यात्मिक अनुभूतियाँ। उनके चैतन्यस्वरूप होने के पश्चात् माँ बसन्ती जी ने जगत्जननी माँ की आज्ञा से इसे प्रकाशित किया।
इस ट्रस्ट के माध्यम से अन्य व्यक्तियों द्वारा लिखित महापुरुषों की समाजोपयोगी धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन का भी प्रावधान है। इस मिशन का उद्देश्य है कि ज्ञान गंगा की धारा को अनगिनत लोगों में अनवरत् प्रवाहित कर सके इसलिये ये पुस्तकें पाठकों के लिये निःशुल्क उपलब्ध हैं।
ज्ञान गंगा मिशन केवल ज्ञान के प्रसार तक सीमित नहीं रहा। भैया जी का मानना था कि केवल छात्रवृत्ति देना शिक्षा-सेवा को पूर्ण नहीं करता। यदि विद्यालय में पर्याप्त कक्षाएँ, बैठने की व्यवस्था, जल-सुविधा, स्वच्छता या सुरक्षित वातावरण न हो, तो विद्यार्थी विशेषकर बालिकाएँ शिक्षा में अनेक मौन बाधाओं का सामना करती हैं। इसलिए मिशन से प्रेरित होकर शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे निर्माण और सहयोग कार्य किए गए, जिनसे विद्यार्थियों को गरिमा, सुविधा और विश्वास के साथ सीखने का वातावरण मिल सके।
इन कार्यों की भावना यही रही कि शिक्षा केवल फीस या पुस्तकों से पूर्ण नहीं होती; उसके लिए वातावरण, सुविधाएँ और संस्थागत संबल भी आवश्यक हैं।

महालक्ष्मी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, प्रतापनगर में ‘श्री नन्दकिशोर शारदा स्वागत कक्ष’ और तीन कक्षाओं का निर्माण।

महिला महाविद्यालय, जोधपुर में ‘कुमारी बसन्ती मनिहार कॉमर्स ब्लॉक’ के निर्माण हेतु आर्थिक सहयोग।

श्रीमती तुलसी देवी की स्मृति में बालिका विद्यालयों में पेयजल सुविधा का निर्माण।

7 बालिका विद्यालयों की 16 कक्षाओं के लिए फर्नीचर की व्यवस्था, ताकि रोज़मर्रा की पढ़ाई अधिक सहज हो सके।

विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा-संसाधनों से जोड़ने के लिए कम्प्यूटर लैब जैसी सुविधाओं का सहयोग।

बाउंड्री वॉल, स्वच्छता, प्रवेश व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्यों ने विद्यालयों को सुरक्षित, स्वस्थ और पूर्ण शिक्षण-स्थल बनाने में सहयोग दिया।
हॉल, कक्षाएँ, कम्प्यूटर लैब, प्याऊ, फर्नीचर और अन्य सुविधाएँ सिवांची गेट, अल्पभाषा राजमहल, जालोरी गेट, भगत की कोठी, राजमहल, महामंदिर और सरदारपुरा क्षेत्र के विद्यालयों में ट्रस्टियों, जनप्रतिनिधियों और समाज के सहयोग से विकसित हुईं।
कक्षाओं, प्याऊ, फर्नीचर, कम्प्यूटर लैब और अन्य आधारभूत सुविधाओं जैसे कार्य ट्रस्ट सदस्यों, जनसहयोग और स्थानीय प्रतिनिधियों के माध्यम से अलग-अलग रूप में आगे बढ़ते हैं। किसी विशेष सहयोग या निर्माण-कार्य से जुड़ने के लिए हमसे संपर्क करें।
यह ट्रस्ट आयकर अधिनियम की धारा 12A एवं 80G के अंतर्गत पंजीकृत है। इसके पंजीकरण दस्तावेज़ और 2019–20 से वर्ष-वार अंकेक्षित वित्तीय प्रतिवेदन पारदर्शिता पृष्ठ पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
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